sri lakshmi sahasra nama stotram hindi-श्री लक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्रं

sri lakshmi sahasra nama stotram hindi
mata sri lakshmi sahasra nama stotram hindi

 

नाम्नां साष्टसहस्रञ्च ब्रूहि गार्ग्य महामते |
महालक्ष्म्या महादेव्या भुक्तिमुक्त्यर्थसिद्धये ‖ 1 ‖

गार्ग्य उवाच
सनत्कुमारमासीनं द्वादशादित्यसन्निभम् |
अपृच्छन्योगिनो भक्त्या योगिनामर्थसिद्धये ‖ 2 ‖

सर्वलौकिककर्मभ्यो विमुक्तानां हिताय वै |
भुक्तिमुक्तिप्रदं जप्यमनुब्रूहि दयानिधे ‖ 3 ‖

सनत्कुमार भगवन्सर्वज्ञोऽसि विशेषतः |
आस्तिक्यसिद्धये नॄणां क्षिप्रधर्मार्थसाधनम् ‖ 4 ‖

खिद्यन्ति मानवास्सर्वे धनाभावेन केवलम् |
सिद्ध्यन्ति धनिनोऽन्यस्य नैव धर्मार्थकामनाः ‖ 5 ‖

दारिद्र्यध्वंसिनी नाम केन विद्या प्रकीर्तिता |
केन वा ब्रह्मविद्याऽपि केन मृत्युविनाशिनी ‖ 6 ‖

सर्वासां सारभूतैका विद्यानां केन कीर्तिता |
प्रत्यक्षसिद्धिदा ब्रह्मन् तामाचक्ष्व दयानिधे ‖ 7 ‖

सनत्कुमार उवाच
साधु पृष्टं महाभागास्सर्वलोकहितैषिणः |
महतामेष धर्मश्च नान्येषामिति मे मतिः ‖ 8 ‖

ब्रह्मविष्णुमहादेवमहेन्द्रादिमहात्मभिः |
सम्प्रोक्तं कथयाम्यद्य लक्ष्मीनामसहस्रकम् ‖ 9 ‖

यस्योच्चारणमात्रेण दारिद्र्यान्मुच्यते नरः |
किं पुनस्तज्जपाज्जापी सर्वेष्टार्थानवाप्नुयात् ‖ 10 ‖

अस्य श्रीलक्ष्मीदिव्यसहस्रनामस्तोत्रमहामन्त्रस्य आनन्दकर्दमचिक्लीतेन्दिरासुतादयो महात्मानो महर्षयः अनुष्टुप्छन्दः विष्णुमाया शक्तिः महालक्ष्मीः परादेवता श्रीमहालक्ष्मीप्रसादद्वारा सर्वेष्टार्थसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः |

ध्यानम्
पद्मनाभप्रियां देवीं पद्माक्षीं पद्मवासिनीम् |
पद्मवक्त्रां पद्महस्तां वन्दे पद्मामहर्निशम् ‖ 1 ‖

पूर्णेन्दुवदनां दिव्यरत्नाभरणभूषिताम् |
वरदाभयहस्ताढ्यां ध्यायेच्चन्द्रसहोदरीम् ‖ 2 ‖

इच्छारूपां भगवतस्सच्चिदानन्दरूपिणीम् |
सर्वज्ञां सर्वजननीं विष्णुवक्षस्स्थलालयाम् |
दयालुमनिशं ध्यायेत्सुखसिद्धिस्वरूपिणीम् ‖ 3 ‖

स्तोत्रम्
नित्यागतानन्तनित्या नन्दिनी जनरञ्जनी |
नित्यप्रकाशिनी चैव स्वप्रकाशस्वरूपिणी ‖ 1 ‖

महालक्ष्मीर्महाकाली महाकन्या सरस्वती |
भोगवैभवसन्धात्री भक्तानुग्रहकारिणी ‖ 2 ‖

ईशावास्या महामाया महादेवी महेश्वरी |
हृल्लेखा परमा शक्तिर्मातृकाबीजरूपिणी ‖ 3 ‖

नित्यानन्दा नित्यबोधा नादिनी जनमोदिनी |
सत्यप्रत्ययनी चैव स्वप्रकाशात्मरूपिणी ‖ 4 ‖

त्रिपुरा भैरवी विद्या हंसा वागीश्वरी शिवा |
वाग्देवी च महारात्रिः कालरात्रिस्त्रिलोचना ‖ 5 ‖

भद्रकाळी कराळी च महाकाळी तिलोत्तमा |
काळी कराळवक्त्रान्ता कामाक्षी कामदा शुभा ‖ 6 ‖

चण्डिका चण्डरूपेशा चामुण्डा चक्रधारिणी |
त्रैलोक्यजयिनी देवी त्रैलोक्यविजयोत्तमा ‖ 7 ‖

सिद्धलक्ष्मीः क्रियालक्ष्मीर्मोक्षलक्ष्मीः प्रसादिनी |
उमा भगवती दुर्गा चान्द्री दाक्षायणी शिवा ‖ 8 ‖

प्रत्यङ्गिरा धरावेला लोकमाता हरिप्रिया |
पार्वती परमा देवी ब्रह्मविद्याप्रदायिनी ‖ 9 ‖

अरूपा बहुरूपा च विरूपा विश्वरूपिणी |
पञ्चभूतात्मिका वाणी पञ्चभूतात्मिका परा ‖ 10 ‖

काळी मा पञ्चिका वाग्मी हविःप्रत्यधिदेवता |
देवमाता सुरेशाना देवगर्भाऽम्बिका धृतिः ‖ 11 ‖

सङ्ख्या जातिः क्रियाशक्तिः प्रकृतिर्मोहिनी मही |
यज्ञविद्या महाविद्या गुह्यविद्या विभावरी ‖ 12 ‖

ज्योतिष्मती महामाता सर्वमन्त्रफलप्रदा |
दारिद्र्यध्वंसिनी देवी हृदयग्रन्थिभेदिनी ‖ 13 ‖

सहस्रादित्यसङ्काशा चन्द्रिका चन्द्ररूपिणी |
गायत्री सोमसम्भूतिस्सावित्री प्रणवात्मिका ‖ 14 ‖

शाङ्करी वैष्णवी ब्राह्मी सर्वदेवनमस्कृता |
सेव्यदुर्गा कुबेराक्षी करवीरनिवासिनी ‖ 15 ‖

जया च विजया चैव जयन्ती चाऽपराजिता |
कुब्जिका कालिका शास्त्री वीणापुस्तकधारिणी ‖ 16 ‖

सर्वज्ञशक्तिश्श्रीशक्तिर्ब्रह्मविष्णुशिवात्मिका |
इडापिङ्गलिकामध्यमृणालीतन्तुरूपिणी ‖ 17 ‖

यज्ञेशानी प्रथा दीक्षा दक्षिणा सर्वमोहिनी |
अष्टाङ्गयोगिनी देवी निर्बीजध्यानगोचरा ‖ 18 ‖

सर्वतीर्थस्थिता शुद्धा सर्वपर्वतवासिनी |
वेदशास्त्रप्रभा देवी षडङ्गादिपदक्रमा ‖ 19 ‖

शिवा धात्री शुभानन्दा यज्ञकर्मस्वरूपिणी |
व्रतिनी मेनका देवी ब्रह्माणी ब्रह्मचारिणी ‖ 20 ‖

एकाक्षरपरा तारा भवबन्धविनाशिनी |
विश्वम्भरा धराधारा निराधाराऽधिकस्वरा ‖ 21 ‖

राका कुहूरमावास्या पूर्णिमाऽनुमतिर्द्युतिः |
सिनीवाली शिवाऽवश्या वैश्वदेवी पिशङ्गिला ‖ 22 ‖

पिप्पला च विशालाक्षी रक्षोघ्नी वृष्टिकारिणी |
दुष्टविद्राविणी देवी सर्वोपद्रवनाशिनी ‖ 23 ‖

शारदा शरसन्धाना सर्वशस्त्रस्वरूपिणी |
युद्धमध्यस्थिता देवी सर्वभूतप्रभञ्जनी ‖ 24 ‖

अयुद्धा युद्धरूपा च शान्ता शान्तिस्वरूपिणी |
गङ्गा सरस्वतीवेणीयमुनानर्मदापगा ‖ 25 ‖

समुद्रवसनावासा ब्रह्माण्डश्रोणिमेखला |
पञ्चवक्त्रा दशभुजा शुद्धस्फटिकसन्निभा ‖ 26 ‖

रक्ता कृष्णा सिता पीता सर्ववर्णा निरीश्वरी |
काळिका चक्रिका देवी सत्या तु वटुकास्थिता ‖ 27 ‖

तरुणी वारुणी नारी ज्येष्ठादेवी सुरेश्वरी |
विश्वम्भराधरा कर्त्री गळार्गळविभञ्जनी ‖ 28 ‖

सन्ध्यारात्रिर्दिवाज्योत्स्ना कलाकाष्ठा निमेषिका |
उर्वी कात्यायनी शुभ्रा संसारार्णवतारिणी ‖ 29 ‖

कपिला कीलिकाऽशोका मल्लिकानवमल्लिका | [ मल्लिकानवमालिका ] देविका नन्दिका शान्ता भञ्जिका भयभञ्जिका ‖ 30 ‖

कौशिकी वैदिकी देवी सौरी रूपाधिकाऽतिभा |
दिग्वस्त्रा नववस्त्रा च कन्यका कमलोद्भवा ‖ 31 ‖

श्रीस्सौम्यलक्षणाऽतीतदुर्गा सूत्रप्रबोधिका |
श्रद्धा मेधा कृतिः प्रज्ञा धारणा कान्तिरेव च ‖ 32 ‖

श्रुतिः स्मृतिर्धृतिर्धन्या भूतिरिष्टिर्मनीषिणी |
विरक्तिर्व्यापिनी माया सर्वमायाप्रभञ्जनी ‖ 33 ‖

माहेन्द्री मन्त्रिणी सिंही चेन्द्रजालस्वरूपिणी |
अवस्थात्रयनिर्मुक्ता गुणत्रयविवर्जिता ‖ 34 ‖

ईषणात्रयनिर्मुक्ता सर्वरोगविवर्जिता |
योगिध्यानान्तगम्या च योगध्यानपरायणा ‖ 35 ‖

त्रयीशिखा विशेषज्ञा वेदान्तज्ञानरूपिणी |
भारती कमला भाषा पद्मा पद्मवती कृतिः ‖ 36 ‖

गौतमी गोमती गौरी ईशाना हंसवाहिनी |
नारायणी प्रभाधारा जाह्नवी शङ्करात्मजा ‖ 37 ‖

चित्रघण्टा सुनन्दा श्रीर्मानवी मनुसम्भवा |
स्तम्भिनी क्षोभिणी मारी भ्रामिणी शत्रुमारिणी ‖ 38 ‖

मोहिनी द्वेषिणी वीरा अघोरा रुद्ररूपिणी |
रुद्रैकादशिनी पुण्या कल्याणी लाभकारिणी ‖ 39 ‖

देवदुर्गा महादुर्गा स्वप्नदुर्गाऽष्टभैरवी |
सूर्यचन्द्राग्निरूपा च ग्रहनक्षत्ररूपिणी ‖ 40 ‖

बिन्दुनादकळातीता बिन्दुनादकळात्मिका |
दशवायुजयाकारा कळाषोडशसंयुता ‖ 41 ‖

काश्यपी कमलादेवी नादचक्रनिवासिनी |
मृडाधारा स्थिरा गुह्या देविका चक्ररूपिणी ‖ 42 ‖

अविद्या शार्वरी भुञ्जा जम्भासुरनिबर्हिणी |
श्रीकाया श्रीकला शुभ्रा कर्मनिर्मूलकारिणी ‖ 43 ‖

आदिलक्ष्मीर्गुणाधारा पञ्चब्रह्मात्मिका परा |
श्रुतिर्ब्रह्ममुखावासा सर्वसम्पत्तिरूपिणी ‖ 44 ‖

मृतसञ्जीवनी मैत्री कामिनी कामवर्जिता |
निर्वाणमार्गदा देवी हंसिनी काशिका क्षमा ‖ 45 ‖

सपर्या गुणिनी भिन्ना निर्गुणा खण्डिताशुभा |
स्वामिनी वेदिनी शक्या शाम्बरी चक्रधारिणी ‖ 46 ‖

दण्डिनी मुण्डिनी व्याघ्री शिखिनी सोमसंहतिः |
चिन्तामणिश्चिदानन्दा पञ्चबाणप्रबोधिनी ‖ 47 ‖

बाणश्रेणिस्सहस्राक्षी सहस्रभुजपादुका |
सन्ध्यावलिस्त्रिसन्ध्याख्या ब्रह्माण्डमणिभूषणा ‖ 48 ‖

वासवी वारुणीसेना कुळिका मन्त्ररञ्जनी |
जितप्राणस्वरूपा च कान्ता काम्यवरप्रदा ‖ 49 ‖

मन्त्रब्राह्मणविद्यार्था नादरूपा हविष्मती |
आथर्वणिः श्रुतिः शून्या कल्पनावर्जिता सती ‖ 50 ‖

सत्ताजातिः प्रमाऽमेयाऽप्रमितिः प्राणदा गतिः |
अवर्णा पञ्चवर्णा च सर्वदा भुवनेश्वरी ‖ 51 ‖

त्रैलोक्यमोहिनी विद्या सर्वभर्त्री क्षराऽक्षरा |
हिरण्यवर्णा हरिणी सर्वोपद्रवनाशिनी ‖ 52 ‖

कैवल्यपदवीरेखा सूर्यमण्डलसंस्थिता |
सोममण्डलमध्यस्था वह्निमण्डलसंस्थिता ‖ 53 ‖

वायुमण्डलमध्यस्था व्योममण्डलसंस्थिता |
चक्रिका चक्रमध्यस्था चक्रमार्गप्रवर्तिनी ‖ 54 ‖

कोकिलाकुलचक्रेशा पक्षतिः पङ्क्तिपावनी |
सर्वसिद्धान्तमार्गस्था षड्वर्णावरवर्जिता ‖ 55 ‖

शररुद्रहरा हन्त्री सर्वसंहारकारिणी |
पुरुषा पौरुषी तुष्टिस्सर्वतन्त्रप्रसूतिका ‖ 56 ‖

अर्धनारीश्वरी देवी सर्वविद्याप्रदायिनी |
भार्गवी याजुषीविद्या सर्वोपनिषदास्थिता ‖ 57 ‖ [ भुजुषीविद्या ] व्योमकेशाखिलप्राणा पञ्चकोशविलक्षणा |
पञ्चकोशात्मिका प्रत्यक्पञ्चब्रह्मात्मिका शिवा ‖ 58 ‖

जगज्जराजनित्री च पञ्चकर्मप्रसूतिका |
वाग्देव्याभरणाकारा सर्वकाम्यस्थितास्थितिः ‖ 59 ‖

अष्टादशचतुष्षष्ठिपीठिका विद्यया युता |
काळिकाकर्षणश्यामा यक्षिणी किन्नरेश्वरी ‖ 60 ‖

केतकी मल्लिकाऽशोका वाराही धरणी ध्रुवा |
नारसिंही महोग्रास्या भक्तानामार्तिनाशिनी ‖ 61 ‖

अन्तर्बला स्थिरा लक्ष्मीर्जरामरणनाशिनी |
श्रीरञ्जिता महाकाया सोमसूर्याग्निलोचना ‖ 62 ‖

अदितिर्देवमाता च अष्टपुत्राऽष्टयोगिनी |
अष्टप्रकृतिरष्टाष्टविभ्राजद्विकृताकृतिः ‖ 63 ‖

दुर्भिक्षध्वंसिनी देवी सीता सत्या च रुक्मिणी |
ख्यातिजा भार्गवी देवी देवयोनिस्तपस्विनी ‖ 64 ‖

शाकम्भरी महाशोणा गरुडोपरिसंस्थिता |
सिंहगा व्याघ्रगा देवी वायुगा च महाद्रिगा ‖ 65 ‖

अकारादिक्षकारान्ता सर्वविद्याधिदेवता |
मन्त्रव्याख्याननिपुणा ज्योतिश्शास्त्रैकलोचना ‖ 66 ‖

इडापिङ्गळिकामध्यासुषुम्ना ग्रन्थिभेदिनी |
कालचक्राश्रयोपेता कालचक्रस्वरूपिणी ‖ 67 ‖

वैशारदी मतिश्श्रेष्ठा वरिष्ठा सर्वदीपिका |
वैनायकी वरारोहा श्रोणिवेला बहिर्वलिः ‖ 68 ‖

जम्भिनी जृम्भिणी जम्भकारिणी गणकारिका |
शरणी चक्रिकाऽनन्ता सर्वव्याधिचिकित्सकी ‖ 69 ‖

देवकी देवसङ्काशा वारिधिः करुणाकरा |
शर्वरी सर्वसम्पन्ना सर्वपापप्रभञ्जनी ‖ 70 ‖

एकमात्रा द्विमात्रा च त्रिमात्रा च तथाऽपरा |
अर्धमात्रा परा सूक्ष्मा सूक्ष्मार्थाऽर्थपराऽपरा ‖ 71 ‖

एकवीरा विशेषाख्या षष्ठीदेवी मनस्विनी |
नैष्कर्म्या निष्कलालोका ज्ञानकर्माधिका गुणा ‖ 72 ‖

सबन्ध्वानन्दसन्दोहा व्योमाकाराऽनिरूपिता |
गद्यपद्यात्मिका वाणी सर्वालङ्कारसंयुता ‖ 73 ‖

साधुबन्धपदन्यासा सर्वौको घटिकावलिः |
षट्कर्मा कर्कशाकारा सर्वकर्मविवर्जिता ‖ 74 ‖

आदित्यवर्णा चापर्णा कामिनी वररूपिणी |
ब्रह्माणी ब्रह्मसन्ताना वेदवागीश्वरी शिवा ‖ 75 ‖

पुराणन्यायमीमांसाधर्मशास्त्रागमश्रुता |
सद्योवेदवती सर्वा हंसी विद्याधिदेवता ‖ 76 ‖

विश्वेश्वरी जगद्धात्री विश्वनिर्माणकारिणी |
वैदिकी वेदरूपा च कालिका कालरूपिणी ‖ 77 ‖

नारायणी महादेवी सर्वतत्त्वप्रवर्तिनी |
हिरण्यवर्णरूपा च हिरण्यपदसम्भवा ‖ 78 ‖

कैवल्यपदवी पुण्या कैवल्यज्ञानलक्षिता |
ब्रह्मसम्पत्तिरूपा च ब्रह्मसम्पत्तिकारिणी ‖ 79 ‖

वारुणी वारुणाराध्या सर्वकर्मप्रवर्तिनी |
एकाक्षरपराऽऽयुक्ता सर्वदारिद्र्यभञ्जिनी ‖ 80 ‖

पाशाङ्कुशान्विता दिव्या वीणाव्याख्याक्षसूत्रभृत् |
एकमूर्तिस्त्रयीमूर्तिर्मधुकैटभभञ्जिनी ‖ 81 ‖

साङ्ख्या साङ्ख्यवती ज्वाला ज्वलन्ती कामरूपिणी |
जाग्रती सर्वसम्पत्तिस्सुषुप्ता स्वेष्टदायिनी ‖ 82 ‖

कपालिनी महादंष्ट्रा भ्रुकुटी कुटिलानना |
सर्वावासा सुवासा च बृहत्यष्टिश्च शक्वरी ‖ 83 ‖

छन्दोगणप्रतिष्ठा च कल्माषी करुणात्मिका |
चक्षुष्मती महाघोषा खड्गचर्मधराऽशनिः ‖ 84 ‖

शिल्पवैचित्र्यविद्योता सर्वतोभद्रवासिनी |
अचिन्त्यलक्षणाकारा सूत्रभाष्यनिबन्धना ‖ 85 ‖

सर्ववेदार्थसम्पत्तिस्सर्वशास्त्रार्थमातृका |
अकारादिक्षकारान्तसर्ववर्णकृतस्थला ‖ 86 ‖

सर्वलक्ष्मीस्सदानन्दा सारविद्या सदाशिवा |
सर्वज्ञा सर्वशक्तिश्च खेचरीरूपगोच्छ्रिता ‖ 87 ‖

अणिमादिगुणोपेता परा काष्ठा परा गतिः |
हंसयुक्तविमानस्था हंसारूढा शशिप्रभा ‖ 88 ‖

भवानी वासनाशक्तिराकृतिस्थाखिलाऽखिला |
तन्त्रहेतुर्विचित्राङ्गी व्योमगङ्गाविनोदिनी ‖ 89 ‖

वर्षा च वार्षिका चैव ऋग्यजुस्सामरूपिणी |
महानदीनदीपुण्याऽगण्यपुण्यगुणक्रिया ‖ 90 ‖

समाधिगतलभ्यार्था श्रोतव्या स्वप्रिया घृणा |
नामाक्षरपरा देवी उपसर्गनखाञ्चिता ‖ 91 ‖

निपातोरुद्वयीजङ्घा मातृका मन्त्ररूपिणी |
आसीना च शयाना च तिष्ठन्ती धावनाधिका ‖ 92 ‖

लक्ष्यलक्षणयोगाढ्या ताद्रूप्यगणनाकृतिः |
सैकरूपा नैकरूपा सेन्दुरूपा तदाकृतिः ‖ 93 ‖

समासतद्धिताकारा विभक्तिवचनात्मिका |
स्वाहाकारा स्वधाकारा श्रीपत्यर्धाङ्गनन्दिनी ‖ 94 ‖

गम्भीरा गहना गुह्या योनिलिङ्गार्धधारिणी |
शेषवासुकिसंसेव्या चपला वरवर्णिनी ‖ 95 ‖

कारुण्याकारसम्पत्तिः कीलकृन्मन्त्रकीलिका |
शक्तिबीजात्मिका सर्वमन्त्रेष्टाक्षयकामना ‖ 96 ‖

आग्नेयी पार्थिवा आप्या वायव्या व्योमकेतना |
सत्यज्ञानात्मिकाऽऽनन्दा ब्राह्मी ब्रह्म सनातनी ‖ 97 ‖

अविद्यावासना मायाप्रकृतिस्सर्वमोहिनी |
शक्तिर्धारणशक्तिश्च चिदचिच्छक्तियोगिनी ‖ 98 ‖

वक्त्रारुणा महामाया मरीचिर्मदमर्दिनी |
विराट् स्वाहा स्वधा शुद्धा नीरूपास्तिस्सुभक्तिगा ‖ 99 ‖

निरूपिताद्वयीविद्या नित्यानित्यस्वरूपिणी |
वैराजमार्गसञ्चारा सर्वसत्पथदर्शिनी ‖ 100 ‖

जालन्धरी मृडानी च भवानी भवभञ्जनी |
त्रैकालिकज्ञानतन्तुस्त्रिकालज्ञानदायिनी ‖ 101 ‖

नादातीता स्मृतिः प्रज्ञा धात्रीरूपा त्रिपुष्करा |
पराजिताविधानज्ञा विशेषितगुणात्मिका ‖ 102 ‖

हिरण्यकेशिनी हेमब्रह्मसूत्रविचक्षणा |
असङ्ख्येयपरार्धान्तस्वरव्यञ्जनवैखरी ‖ 103 ‖

मधुजिह्वा मधुमती मधुमासोदया मधुः |
माधवी च महाभागा मेघगम्भीरनिस्वना ‖ 104 ‖

ब्रह्मविष्णुमहेशादिज्ञातव्यार्थविशेषगा |
नाभौ वह्निशिखाकारा ललाटे चन्द्रसन्निभा ‖ 105 ‖

भ्रूमध्ये भास्कराकारा सर्वताराकृतिर्हृदि |
कृत्तिकादिभरण्यन्तनक्षत्रेष्ट्यार्चितोदया ‖ 106 ‖

ग्रहविद्यात्मिका ज्योतिर्ज्योतिर्विन्मतिजीविका |
ब्रह्माण्डगर्भिणी बाला सप्तावरणदेवता ‖ 107 ‖

वैराजोत्तमसाम्राज्या कुमारकुशलोदया |
बगळा भ्रमराम्बा च शिवदूती शिवात्मिका ‖ 108 ‖

मेरुविन्ध्यादिसंस्थाना काश्मीरपुरवासिनी |
योगनिद्रा महानिद्रा विनिद्रा राक्षसाश्रिता ‖ 109 ‖

सुवर्णदा महागङ्गा पञ्चाख्या पञ्चसंहतिः |
सुप्रजाता सुवीरा च सुपोषा सुपतिश्शिवा ‖ 110 ‖

सुगृहा रक्तबीजान्ता हतकन्दर्पजीविका |
समुद्रव्योममध्यस्था समबिन्दुसमाश्रया ‖ 111 ‖

सौभाग्यरसजीवातुस्सारासारविवेकदृक् |
त्रिवल्यादिसुपुष्टाङ्गा भारती भरताश्रिता ‖ 112 ‖

नादब्रह्ममयीविद्या ज्ञानब्रह्ममयीपरा |
ब्रह्मनाडी निरुक्तिश्च ब्रह्मकैवल्यसाधनम् ‖ 113 ‖

कालिकेयमहोदारवीर्यविक्रमरूपिणी |
वडवाग्निशिखावक्त्रा महाकवलतर्पणा ‖ 114 ‖

महाभूता महादर्पा महासारा महाक्रतुः |
पञ्जभूतमहाग्रासा पञ्चभूताधिदेवता ‖ 115 ‖

सर्वप्रमाणा सम्पत्तिस्सर्वरोगप्रतिक्रिया |
ब्रह्माण्डान्तर्बहिर्व्याप्ता विष्णुवक्षोविभूषिणी ‖ 116 ‖

शाङ्करी विधिवक्त्रस्था प्रवरा वरहेतुकी |
हेममाला शिखामाला त्रिशिखा पञ्चलोचना ‖ 117 ‖ [ पञ्चमोचना ] सर्वागमसदाचारमर्यादा यातुभञ्जनी |
पुण्यश्लोकप्रबन्धाढ्या सर्वान्तर्यामिरूपिणी ‖ 118 ‖

सामगानसमाराध्या श्रोत्रकर्णरसायनम् |
जीवलोकैकजीवातुर्भद्रोदारविलोकना ‖ 119 ‖

तटित्कोटिलसत्कान्तिस्तरुणी हरिसुन्दरी |
मीननेत्रा च सेन्द्राक्षी विशालाक्षी सुमङ्गळा ‖ 120 ‖

सर्वमङ्गळसम्पन्ना साक्षान्मङ्गळदेवता |
देहहृद्दीपिका दीप्तिर्जिह्वपापप्रणाशिनी ‖ 121 ‖

अर्धचन्द्रोल्लसद्दंष्ट्रा यज्ञवाटीविलासिनी |
महादुर्गा महोत्साहा महादेवबलोदया ‖ 122 ‖

डाकिनीड्या शाकिनीड्या साकिनीड्या समस्तजुट् |
निरङ्कुशा नाकिवन्द्या षडाधाराधिदेवता ‖ 123 ‖

भुवनज्ञानिनिश्श्रेणी भुवनाकारवल्लरी |
शाश्वती शाश्वताकारा लोकानुग्रहकारिणी ‖ 124 ‖

सारसी मानसी हंसी हंसलोकप्रदायिनी |
चिन्मुद्रालङ्कृतकरा कोटिसूर्यसमप्रभा ‖ 125 ‖

सुखप्राणिशिरोरेखा सददृष्टप्रदायिनी |
सर्वसाङ्कर्यदोषघ्नी ग्रहोपद्रवनाशिनी ‖ 126 ‖

क्षुद्रजन्तुभयघ्नी च विषरोगादिभञ्जनी |
सदाशान्ता सदाशुद्धा गृहच्छिद्रनिवारिणी ‖ 127 ‖

कलिदोषप्रशमनी कोलाहलपुरस्थिता |
गौरी लाक्षणिकी मुख्या जघन्याकृतिवर्जिता ‖ 128 ‖

माया विद्या मूलभूता वासवी विष्णुचेतना |
वादिनी वसुरूपा च वसुरत्नपरिच्छदा ‖ 129 ‖

छान्दसी चन्द्रहृदया मन्त्रस्वच्छन्दभैरवी |
वनमाला वैजयन्ती पञ्चदिव्यायुधात्मिका ‖ 130 ‖

पीताम्बरमयी चञ्चत्कौस्तुभा हरिकामिनी |
नित्या तथ्या रमा रामा रमणी मृत्युभञ्जनी ‖ 131 ‖

ज्येष्ठा काष्ठा धनिष्ठान्ता शराङ्गी निर्गुणप्रिया |
मैत्रेया मित्रविन्दा च शेष्यशेषकलाशया ‖ 132 ‖

वाराणसीवासलभ्या चार्यावर्तजनस्तुता | [ वाराणसीवासरता ] जगदुत्पत्तिसंस्थानसंहारत्रयकारणम् ‖ 133 ‖

त्वमम्ब विष्णुसर्वस्वं नमस्तेऽस्तु महेश्वरि |
नमस्ते सर्वलोकानां जनन्यै पुण्यमूर्तये ‖ 134 ‖

सिद्धलक्ष्मीर्महाकाळि महलक्ष्मि नमोऽस्तु ते |
सद्योजातादिपञ्चाग्निरूपा पञ्चकपञ्चकम् ‖ 135 ‖

यन्त्रलक्ष्मीर्भवत्यादिराद्याद्ये ते नमो नमः |
सृष्ट्यादिकारणाकारवितते दोषवर्जिते ‖ 136 ‖

जगल्लक्ष्मीर्जगन्मातर्विष्णुपत्नि नमोऽस्तु ते |
नवकोटिमहाशक्तिसमुपास्यपदाम्बुजे ‖ 137 ‖

कनत्सौवर्णरत्नाढ्य सर्वाभरणभूषिते |
अनन्तानित्यमहिषीप्रपञ्चेश्वरनायकि ‖ 138 ‖

अत्युच्छ्रितपदान्तस्थे परमव्योमनायकि |
नाकपृष्ठगताराध्ये विष्णुलोकविलासिनि ‖ 139 ‖

वैकुण्ठराजमहिषि श्रीरङ्गनगराश्रिते |
रङ्गनायकि भूपुत्रि कृष्णे वरदवल्लभे ‖ 140 ‖

कोटिब्रह्मादिसंसेव्ये कोटिरुद्रादिकीर्तिते |
मातुलुङ्गमयं खेटं सौवर्णचषकं तथा ‖ 141 ‖

पद्मद्वयं पूर्णकुम्भं कीरञ्च वरदाभये |
पाशमङ्कुशकं शङ्खं चक्रं शूलं कृपाणिकाम् ‖ 142 ‖

धनुर्बाणौ चाक्षमालां चिन्मुद्रामपि बिभ्रती |
अष्टादशभुजे लक्ष्मीर्महाष्टादशपीठगे ‖ 143 ‖

भूमिनीलादिसंसेव्ये स्वामिचित्तानुवर्तिनि |
पद्मे पद्मालये पद्मि पूर्णकुम्भाभिषेचिते ‖ 144 ‖

इन्दिरेन्दिन्दिराभाक्षि क्षीरसागरकन्यके |
भार्गवि त्वं स्वतन्त्रेच्छा वशीकृतजगत्पतिः ‖ 145 ‖

मङ्गळं मङ्गळानां त्वं देवतानां च देवता |
त्वमुत्तमोत्तमानां च त्वं श्रेयः परमामृतम् ‖ 146 ‖

धनधान्याभिवृद्धिश्च सार्वभौमसुखोच्छ्रया |
आन्दोळिकादिसौभाग्यं मत्तेभादिमहोदयः ‖ 147 ‖

पुत्रपौत्राभिवृद्धिश्च विद्याभोगबलादिकम् |
आयुरारोग्यसम्पत्तिरष्टैश्वर्यं त्वमेव हि ‖ 148 ‖

परमेशविभूतिश्च सूक्ष्मात्सूक्ष्मतरागतिः |
सदयापाङ्गसन्दत्तब्रह्मेन्द्रादिपदस्थितिः ‖ 149 ‖

अव्याहतमहाभाग्यं त्वमेवाक्षोभ्यविक्रमः |
समन्वयश्च वेदानामविरोधस्त्वमेव हि ‖ 150 ‖

निःश्रेयसपदप्राप्तिसाधनं फलमेव च |
श्रीमन्त्रराजराज्ञी च श्रीविद्या क्षेमकारिणी ‖ 151 ‖

श्रीम्बीजजपसन्तुष्टा ऐं ह्रीं श्रीं बीजपालिका |
प्रपत्तिमार्गसुलभा विष्णुप्रथमकिङ्करी ‖ 152 ‖

क्लीङ्कारार्थसवित्री च सौमङ्गळ्याधिदेवता |
श्रीषोडशाक्षरीविद्या श्रीयन्त्रपुरवासिनी ‖ 153 ‖

सर्वमङ्गळमाङ्गळ्ये शिवे सर्वार्थसाधिके |
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते ‖ 154 ‖

पुनः पुनर्नमस्तेऽस्तु साष्टाङ्गमयुतं पुनः |
सनत्कुमार उवाच-
एवं स्तुता महालक्ष्मीर्ब्रह्मरुद्रादिभिस्सुरैः |
नमद्भिरार्तैर्दीनैश्च निस्स्वत्वैर्भोगवर्जितैः ‖ 1 ‖

ज्येष्ठा जुष्टैश्च निश्श्रीकैस्संसारात्स्वपरायणैः |
विष्णुपत्नी ददौ तेषां दर्शनं दृष्टितर्पणम् ‖ 2 ‖

शरत्पूर्णेन्दुकोट्याभधवळापाङ्गवीक्षणैः |
सर्वान्सत्त्वसमाविष्टान् चक्रे हृष्टा वरं ददौ ‖ 3 ‖

महालक्ष्मीरुवाच-
नाम्नां साष्टसहस्रं मे प्रमादाद्वापि यस्सकृत् |
कीर्तयेत्तत्कुले सत्यं वसाम्याचन्द्रतारकम् ‖ 4 ‖

किं पुनर्नियमाज्जप्तुर्मदेकशरणस्य च |
मातृवत्सानुकम्पाहं पोषकी स्यामहर्निशम् ‖ 5 ‖

मन्नाम स्तवतां लोके दुर्लभं नास्ति चिन्तितम् |
मत्प्रसादेन सर्वेऽपि स्वस्वेष्टार्थमवाप्स्यथ ‖ 6 ‖

लुप्तवैष्णवधर्मस्य मद्व्रतेष्ववकीर्णिनः |
भक्तिप्रपत्तिहीनस्य वन्द्यो नाम्नां स्तवोऽपि मे ‖ 7 ‖

तस्मादवश्यं तैर्दोषैर्विहीनः पापवर्जितः |
जपेत्साष्टसहस्रं मे नाम्नां प्रत्यहमादरात् ‖ 8 ‖

साक्षादलक्ष्मीपुत्रोऽपि दुर्भाग्योऽप्यलसोऽपि वा |
अप्रयत्नोऽपि मूढोऽपि विकलः पतितोऽपि च ‖ 9 ‖

अवश्यं प्राप्नुयाद्भाग्यं मत्प्रसादेन केवलम् |
स्पृहेयमचिराद्देवा वरदानाय जापिनः |
ददामि सर्वमिष्टार्थं लक्ष्मीति स्मरतां ध्रुवम् ‖ 10 ‖

सनत्कुमार उवाच-
इत्युक्त्वाऽन्तर्दधे लक्ष्मीर्वैष्णवी भगवत्कला |
इष्टापूर्तं च सुकृतं भागधेयं च चिन्तितम् ‖ 11 ‖

स्वं स्वं स्थानं च भोगं च विजयं लेभिरे सुराः |
तदेतत् प्रवदाम्यद्य लक्ष्मीनामसहस्रकम् |
योगिनः पठत क्षिप्रं चिन्तितार्थानवाप्स्यथ ‖ 12 ‖

गार्ग्य उवाच-
सनत्कुमारोयोगीन्द्र इत्युक्त्वा स दयानिधिः |
अनुगृह्य ययौ क्षिप्रं तांश्च द्वादशयोगिनः ‖ 13 ‖

तस्मादेतद्रहस्यं च गोप्यं जप्यं प्रयत्नतः |
अष्टम्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां भृगुवासरे ‖ 14 ‖

पौर्णमास्याममायां च पर्वकाले विशेषतः |
जपेद्वा नित्यकार्येषु सर्वान्कामानवाप्नुयात् ‖ 15 ‖

इति श्रीस्कन्दपुराणे सनत्कुमारसंहितायां लक्ष्मीसहस्रनामस्तो

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